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swami vivekananda chicago bhashan 2:30 minat tak taliya lagatar bajti rahi - शिकागो की धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के पहले 5 शब्द

swami vivekananda chicago bhashan 2:30 minat tak taliya lagatar bajti rahi शिकागो की धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के पहले 5 शब्द 


Sister and Brother off America सिस्टर एंड ब्रदर ऑफ अमेरिका, अमेरिका के भाइयों और बहनों 7000 लोग मंत्रमुग्ध रह गए थे कोई जादू देख लिया हो जैसे ईश्वर की आवाज सुनी हो गई स्वामी विवेकानंद ने कुछ कहा ही नहीं था अब कहने वाले थे कि 5 शब्द इतने मर्मस्पर्शी इतने अविस्मरणीय इसलिए हो गए ये शब्द, कीसी व्यक्ति के मुख से नहीं सनातन धर्म की मूल संस्कृति उदार चरिता नाम तो वसुधैव कुटुंबकम ये समूची दुनिया के लोग अपना भाई है, उदार हृदय वालों के लिए बड़े-बड़े के लिए संपूर्ण धरती ही उनका परिवार है देश की सीमाओं से बाहर न जाने वाले दायरे से बाहर सब को पराया समझने वाले पश्चिमी समाज को स्वामी विवेकानंद के गीत विश्वास ही नहीं हुआ कि हजारों मील दूर से आया हुआ एक व्यक्ति जिसके ना तो धर्म का संबंध है और न ही रक्त का संबंध है न संस्कार का है, जिसे दुनिया के बड़े-बड़े बुद्धिजीवी आज तक नहीं समझ पाए कैसे हम भारतवासि कैसे किसी को अपना बना लेते हैं मनुष्य मात्र में भेदभाव नहीं करते चमड़ी के रंग से किसी को छोटा या बड़ा नहीं समझते और कैसे हमारे यहां इंसान की कीमत कुटुंबकम हमारी संस्कृति और चाहिए विश्व का हर व्यक्ति है जो स्वामी विवेकानंद ने उस दिन के सिस्टर एंड ब्रदर हमें पश्चिम वाले तीसरी दुनिया कहते रहे उनकी मर्जी हमारे लिए तो दुनिया दूसरी जाति नहीं होती सिर्फ एक होती है और उसमें सभी सिमट आते हैं गोरे गाल छोटे बड़े अमीर गरीब पशु-पक्षी पेड़-पौधे नदिया काले गोरे का भेद नहीं हर दिल से हमारा नाता है कुछ और ना आता हो हमको हमें प्यार निभाना आता है जीते हो किसी ने देश तो क्या हमने तो दिलों को जीता है जहां राम अभी तक है नर में नारी में अभी तक जीता है नदियों को भी जहां माता कहके बुलाते हैं इतना आदर इंसान तो क्या पत्थर भी पूजे जाते हैं इस धरती पे मैंने जनम लिया यह सोच के मैं इधर आता हूं भारत का रहने वाला हूं भारत की बात सुनाता हूं,

स्वामी विवेकानंद शिक्षा पर विचार


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5 शब्दों के बाद स्वामी विवेकानंद धाराप्रवाह हो गए जो अगली बात इट्स माय हार्ट विद जॉय अनस्पीकेबल कॉर्डियल वेलकम बैक पैनल प्यार और अपनेपन से हमारा स्वागत किया उसके लिए मैं आपका आभारी हूं इस वक्तव्य पर मैं आगे बात करूं इससे पहले यह जान लीजिए कि विश्व धर्म संसद में स्वामी जी बोल रहे थे उसके तकरीबन डेढ़ महीने पहले वह अमेरिका और अमेरिका ने उनका स्वागत उसी घृणा से किया था जो अश्वेत लोगों के लिए उनके मन में हुआ करती थी गेट आउट get out डेढ़ महीने तक स्वामी जी बस यही सुनते रहे स्वामी विवेकानंद ने अपने अंदर कड़वाहट नहीं भरने दी स्वामी जी उस दिन अकेले मंच पर नहीं आए थे उनके भारत 400000 वर्षों का इतिहास भारत की संस्कृति के अमृतधाम करने वाली संस्कृति है स्वामी जी ने 3 महीने अपमान का प्रत्यय आंखों से जब निकली स्वामीजी आदि देव नीलकंठ हो गए थे हमें देखना है दुनिया की कालिख हमारी आत्मा में नहीं पढ़ना चाहिए बुराई का जवाब देना हमारी परंपरा नहीं है हम सब ने उस साधु बाबा की कहानी तो सुनी होगी नदी में स्नान करते हुए एक डूबते हुए को बचाने की कोशिश कर रहे थे उनको डंक मारता और साधु बाबा बार पानी से बाहर निकालने की कोशिश करते किसी ने पूछा ऐसा क्यों कर रहे हैं आप छोड़ दीजिए बच्चों को जाने दीजिए आपके हाथ लहूलुहान हो चुके डंक मारना बिच्छू का धर्म है और डूबते हुए को बचाना मेरा अपना धर्म नहीं छोड़ रहा है तो मैं अपना धर्म कैसे छोड़ दूं 


स्वामी विवेकानंद के दार्शनिक विचार


स्वामी जी ने आगे कहा राइट बिलॉन्ग टू अ लिस्ट ऑफ द वर्ल्ड बोथ टोलरेंस एंड यूनिवर्सल एक्सेप्टर गर्व है कि मैं उस महान धर्म का अनुगामी भी डिस्ट्रिक्ट पूरी दुनिया को सहनशीलता और स्वीकार सिखाया है स्वामी विवेकानंद जस्ट सनातन धर्म की बात कर रहे थे आज उसी पर इनटोलरेंस आरोप लगाया जाता है बगैर यह सोचे कि दूसरे धर्मों का आदर एक हिंदू अपने डीएनए में लेकर पैदा होता है 8000 साल पहले ऋग्वेद में हमारे घोषणा कर दी थी एकं सद् विप्रा बहुधा वदंति सत्य एक है लेकिन विद्वान अपनी-अपनी समझ के अनुसार उसकी अलग-अलग परिभाषा में अलग-अलग बताया है तुम्हारा मेरा रास्ता भी सही है सब पर मैं यह बतलाता हूं राह पकड़ तू एक चला चल पा जाएगा मधुशाला रास्ते एक ही गंतव्य की ओर जा रहे हैं एक ही मधुशाला की ओर जा रहे हैं प्राऊड टो बिलॉन्ग टू रिलीजिंग बस स्टॉप द वर्ल्ड फूड टोलरेंस एंड यूनिवर्सल एक्सेप्टेंस स्वामी जी की पूरी हुई दुनिया के 4000 से भी ज्यादा धर्मों को एक लाइन में खड़ा करने के लिए पर्याप्त अगली सुबह अमेरिकी अखबारों के पन्ने स्वामी विवेकानंद के यश गान विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद सबसे महान वक्ता थे उन्हें सुनने के बाद लगता है कि जिस देश में इतने विद्वान और बुद्धिमान लोग रहते हैं वहां मिश्रित को वरिष्ठता रितिक ने लिखा कई विद्वानों का भाषण बहुत अच्छा था लेकिन एक हिंदू साधु के उसके आगे रंग और जंग से खुद को सर्वश्रेष्ठ मानने वाले दुनिया के अनेक देश उस दिन समझ गए कि भारत की मृदा और उसके सनातन ज्ञान का सामना दूरियां कभी नहीं कर सकती वह तो मान गए हम आज भी उसी को अच्छा मानते हैं 


स्वामी विवेकानंद के सामाजिक विचार

जो इंपोर्ट होकर आया हो चाहे वह कोई वस्तु हो या पहचान फिर आप से बड़ी आग्रह करूंगा जब पार्क पार्क करता आया हूं न्यूज़ आंखें खोल के चोरी स्वामी विवेकानंद आपके हीरो होने चाहिए क्योंकि आपके हीरो से हीरो भी वही है चंद्र बोस ने कहा था अगर स्वामी विवेकानंद जीवित होते तो आज मैं उनके चरणों में बैठा होता गुरुदेव श्री रविंद्र नाथ टैगोर कहते थे यदि भारत को जानना है तो स्वामी विवेकानंद को पढ़ो महात्मा गांधी ने कहा था स्वामी विवेकानंद को पढ़ने के बाद भारत के प्रति मेरी भक्ति 1000 गुना बढ़ गई स्वामी विवेकानंद को कंडेंस इंडिया संघनित भारत के अतिथि भारत का आकार और विस्तार अकेले स्वामी विवेकानंद ने बताया है अगर आपको लगता है राष्ट्रधर्म नहीं तो थोड़ा और 11 तरीके जहां अंग्रेजों ने खुद लिखा है 897 के बाद उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ क्रांति करने वाले जितनी भी सेनानियों को पकड़ा उनमें से अधिकांश के पास स्वामी जी की फोटो उनसे संबंधित कोई न कोई फिर भी अगर आप इस दिल पर है कि जब तक कोई सात समंदर पार से अप्रूवल का इतना लगा दे तब तक आप किसी को नहीं मानेंगे तो महान अमेरिकी स्कॉलर जॉन हेनरी लाइट को पढ़ लीजिए उन्होंने लिखा है अकेले स्वामी विवेकानंद का ज्ञान सभी अमेरिकी प्रोफेसरों के ज्ञान के जोर से अधिक हमें समझना है अपना लेने वाली समाहित कर लेने वाली हमारी सोच को समझना है हिंदू परंपरा को समझना है सनातन धर्म को समझना है भारत को समझना है सचिन पाठक लेकिन दुनिया के किसी धर्म से हमें कोई गैर नहीं हम आपको सांप को भी दूध पिलाते हैं जब तक हम उसे नहीं मारते जब तक वो हमे नुकसान न पहुंचे

अंत में सत्कर्म होगा जय भारत जय भारती

हिरण्यक शिपु वंश प्रम्परा का वर्णन
4 vedo 18 Purano sahit 14 Vidhyavo Ka Vibhajan
16 हिन्दू संस्कार की सम्पूर्ण शास्त्रीय विधि
विज्ञान परिचय
भारतीय इतिहास की प्राचीन वंशावली
श्री कल्किपुराण अध्याय १५ 




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